Sunday, March 8, 2009

तू राजा की राज दुलारी मैं सिर्फ़ लंगोटे आला सुं

तू राजा की राज दुलारी मैं सिर्फ़ लंगोटे आला सुं
भांग रगड़ के पिया करूँ मैं कुण्डी सोट्टे आला सुं
तू राजा की छोरी सै म्हारे एक भी दास्सी दास नहीं
शौल दुशाल्ले ओढ़न आली म्हारे कम्बल तक भी पास नहीं...

तू बागन की कोयल सै याडैय बर्फ पडे हरी घास नहीं
किस तरियां जी लाग्गे तेरा शतरंज चौपड़ ताश नहीं
किसी साहूकार सै ब्याह करवाले मैं खालिस टोटे आला सुं
तू राजा की राज दुलारी मैं सिर्फ़ लंगोटे आला सुं
भांग रगड़ के पिया करूँ मैं कुण्डी सोट्टे आला सुं

मैं धूने में तप्या करूँ तू आग देख कै डर ज्यागी
राख घोल कै पिया करूं मेरे भाग देख कै डर ज्यागी
सौ सौ सांप पड़े रहें गल सांप देख कै डर ज्यागी
तांडव नाच करे बन मैं रंग राग देख कै डर ज्यागी
तन्नै जुल्फां आला छोरा चाहिए
तन्नै जुल्फां आला छोरा चाहिए मैं लाम्बे चोट्टे आला सुं
भांग रगड़ कै पिया करूँ मैं कुण्डी सोट्टे आला सुं.

( इस हरियाणवी रागनी (गीत ) को हाल ही में रिलीज़ हुई हिन्दी फ़िल्म लक्की ओये, ओये लक्की में प्रस्तुत लिया गया है, मूल रूप से ये हरयाणवी रागनी है जिसमे भगवान शिव देवी पार्वती को ये समझा रहे हैं की वो उनसे शादी करे क्यूंकि वो एक फक्कड़ साधू हैं और वो राजा की बेटी है, दोनों का मेल नही हो सकताइस गीत को फ़िल्म में हालाँकि ज्यादा प्रचार नही मिला लेकिन जो भी इसे सुनता है बार बार सुनना चाहता है, इसकी संगीत की मिठास कानो को सुकून देती है और बोल दिल को छू लेते हैंफ़िल्म में इसे मास्टर महावीर ने गया है। )

7 comments:

योगेश समदर्शी said...

बहुत खूब... रागनी वास्तव में बहुत बेहतरीन है... कई बार सुनी है पर पढ कर और मजा आया... आपका आभार...

RD said...

VERY GOOD BRO...
KEEP IT UP
liveharyana.blogspot.com

अनिल कान्त : said...

सही कहा मैं भी पसंद करता हूँ ये गाना

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

chaviarora said...

our article is really good

ravi sharma said...

bahut achhe bhai..हीसे काम करनीया भी चाहिए कोए तो....लाग्या रह

ravi sharma said...

एंडी है भै...लाग्या रह.

Dev said...

Aditya jee apne bahut khub likha kee sahitya likhna ek achhi baat hai.... main bhagwan se prarthana karunga kee apko likhne kee achhi kala aur achhi soch de...... main apki respect karta hun.... kee mere aas pass ke gaon se koi achha vayakti hai .... haan hum naa kabhi apne bachpan aur naa hee apne gaon ko bhul sakte hai kyonki wahan per hamara bachpan gujra hai aur humen wahi se sabh kuchh siksya mili hai.... again i prey to God kee woh apko ek achhi sakti pardan kare
thanks