Tuesday, December 1, 2009

तेजस्वनी शर्मा ; जीवटता के जज्बे की मिसाल

पंचकुला की तेजस्वनी शर्मा इंसानी जीवटता और ज़िन्दगी को जीने के जज्बे की मिसाल बन गई है.. अपने आत्मविश्वाश के दम पर ये लड़की आज जिस मुकाम पर पहुंची है वहां तक पहुँचने के लोग सपने ही देखते हैं लेकिन जो उन सपनो को पूरा करने का दम रखते हैं उनमे से ही है तेजस्वनी शर्मा..
1987 को जन्मी तेजस्वनी जन्म से ही विभिन्न प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक विकलागताओं से ग्रस्त थी। तेजस्वनी की मां हर्ष शर्मा ने बताया कि तेजस्वनी पांच साल तक पीजीआई में भर्ती रही। 11 साल की उम्र तक तो वह बोल भी नहीं पाती थी लेकिन एक दिन हम कार में जा रहे थे। गाड़ी में देशभक्ति का गाना लगा हुआ था, अचानक कैसेट खराब होकर बीच में बंद हो गया। तभी तेजस्वनी ने आगे का गाना गाना शुरू कर दिया। संगीत के प्रति उसके रुझान को देखते हुए तेजस्वनी को संगीत सिखाने के लिए घर पर ही शिक्षक बुलाया गया। धीरे धीरे उसने बोलना शुरू किया..
इसके बाद धीरे धीरे तेजस्वनी का आत्मविश्वास जागृत होना शुरू हुआ। और इसके बाद तेजस्वनी ने धीरे धीरे गायन शुरू किया। सबसे पहले उन्होंने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना गाया। 10 वर्ष की आयु में जो लड़की शब्द भी नहीं बोलती थी, आज हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी और हिमाचली भाषा बोलने एवं समझने में पूर्णत: निपुण है। जब उससे पूछा जाता है की अब वो क्या करना चाहती है उसकी तमन्ना क्या है तो उसका क्या जवाब होता है और आगे जाने की तमन्ना है.. और भी अच्छा गाने की तमन्ना है..
तेजस्वनी की प्रतिभा को निखारने में उसके माता-पिता ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। हर समय वह तेजस्वनी की प्रतिभा में निखार के लिए जरूरत पड़ने वाली चीज मुहैया करवाते थे। उसे साधना स्कूल का भी विशेष योगदान प्राप्त हुआ है। इस पुरस्कार के लिए सक्षम रिहेबिलिटेशन सोसाईटी ने आभार प्रकट किया है। सोसाईटी के माध्यम से तेजस्वनी का नाम इस पुरस्कार के लिए जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार की सहायता से भारत सरकार को भिजवाया गया था, जिसे सरकार ने स्वीकार किया और पुरस्कार के लिए चयनित किया।तेजस्वनी के भाई और बहन ने भी उसे पूरा सहयोग दिया..

4 comments:

Ram said...

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महेन्द्र मिश्र said...

तेजस्वनी होनहार है भविष्य में उससे काफी उम्मीदे की जा सकती है .बढ़िया जानकारी पूर्ण समाचार ....

संगीता पुरी said...

आत्‍मविश्‍वास भी तो परिस्थितियों से ही बनता है .. यदि वह बोल नहीं पाती .. गा नहीं पाती .. अभिभावक या भाई बहन सहयोग नहीं करते .. तो अपाहिजों का जीना मुश्किल हो जाता है .. लेकिन उन लोगों के लिए तेजस्विनी शर्मा तो अवश्‍य मिसाल है .. जो अपनी किसी कमजोरी की वजह से आत्‍मविश्‍वास बिल्‍कुल खो देते हैं।

संगीता पुरी said...

उनलोगों के लिए तेजस्विनी शर्मा तो मिसाल है ही .. जो अपनी छोटी छोटी कमियों को देख्‍ाकर आत्‍मविश्‍वास खो देते हैं !!