Sunday, December 25, 2011

विवादों का विश्व कप.

पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने सोचा भी नहीं होगा की विश्व कबड्डी कप का दूसरा सीजन खेल की बजाय दुसरे कारणों से इतनी चर्चा में रहेगा. 5 करोड़ की इनाम राशि वाले इस विश्व कप पर सरकार ने २० करोड़ के करीब का खर्च कर दिया. पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक नामी हस्तियों से लेकर फ़िल्मी कलाकारों तक को कबड्डी के मैदान में बुलाकर इसे चर्चा में लाने की कोशिश में लगे रहे सुखबीर बादल के इस सपने को विवादों ने ज्यादा चर्चा में ला दिया. ये कप कभी महिला खिलाडियों से भेदभाव की वजह से चर्चा में रहा तो कभी डोप टेस्ट में फेल कबड्डी खिलाडियों के संख्या में लगातार बढ़ोतरी की वजह से.
४ नवम्बर को शुरू और २० नवम्बर को संपन्न हुए इस कप में महिला और पुरुष दोनों वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपना परचम लहरा कर खिताब जीते. पुरुषों ने कनाडा को 59-25 से रौंदकर अपना वर्चस्व कायम रखा वहीं महिला टीम ने फाइनल में इंग्लैंड को 44-17 से हरा कर पहली बार इस कप पर कब्ज़ा किया. पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने विजेता पुरुष टीम को दो करोड़ और महिला टीम को एक करोड रुपये का इनाम ट्रॉफियों के साथ प्रदान किया। दुसरे स्थान पर रही कनाडा की पुरुष टीम को भी एक करोड़ रुपये मिले। दूसरे कबड्डी वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा चर्चा मिली इसमें भाग ले रहे खिलाड़ियों की डोप टेस्ट रिपोर्ट के पोजिटिव आने पर.. इस कप में भाग लेने वाली सभी टीमों के 53 खिलाड़ी की डोप टेस्ट में फेल हो गये. इनमें 49 खिलाड़ी डोप सेंपल में पॉजिटिव पाए गए हैं, जबकि अमेरिका की टीम के चार खिलाड़ियों ने पहले ही सेंपल देने से मना कर दिया था। ऐसे में ये चारों खिलाड़ी भी डोप में फेल साबित हुए हैं। सुखद ये रहा की पहली बार कबड्डी वर्ल्ड कप में विजेता बनी भारतीय महिला टीम के खिलाड़ी रिपोर्ट में बिल्कुल साफ निकले हैं। पंजाब के खेल निदेशक पंजाब परगट सिंह ने डोप टेस्ट में फेल खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पुष्टि की है. जिसके तहत डोप में फेल खिलाड़ियों को इनाम की धनराशि नहीं दी जाएगी।
उधर ये कप महिला टीम के साथ भेदभाव के लिए भी याद किया जाएगा. विश्व कप जीतने वाली महिला खिलाडियों को आयोजकों ने अगले दिन ही भुला दिया. विश्व कप हाथ में लिए ये महिला खिलाड़ी होटल के बाहर ऑटो के लिए इंतज़ार करती रही लेकिन आयोजकों ने इतना भी मुनासिब नहीं समझा की इन्हें सम्मानजनक तरीके से इनके घरों तक भिजवा दिया जाए. आयोजन समिति ने इन खिलाड़ियों के लिए न तो बस का इंतजाम किया था और न ही किसी दूसरी गाड़ी का। ऐसे में खिलाड़ी हाथों में वर्ल्ड कप लेकर कोच जसकरन के साथ पैदल ही सड़क पर निकल पड़े। और फिर रस्ते से ही इन्होने ऑटो पकड़कर बस स्टैंड का रुख किया. इन खिलाड़ियों ने ये भी आरोप लगाया था की उन्हें पुरुषों के मुकाबले कम इनामी राशी दी गई.
विशव कप के दौरान अमेरिका की टीम ने भी आयोजकों पर कई आरोप लगाये. जिनमे कहा गया की आयोजक कप का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच में करवाने के इच्छुक हैं इसलिए उनकी टीम को परेशान किया जा रहा है. लेकिन आयोजक लगातार सभी आरोपों से बचते हुए उन्हें झूठे और बेबुनियाद बताते रहे. कबड्डी को पंजाब की माँ खेल कहा जाता है. राज्य के हर गाँव और कसबे में ये खेल खेला जाता है. पंजाब सरकार ने पिछले साल विशव कप कबड्डी का आयोजन करके इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाने की जो कवायद शुरू की थी उसमे वो काफी हद तक सफल रही लेकिन इसके दुसरे सीजन में जिस तरह के आरोप लगे उन्होंने कप का दामन दागदार कर दिया. पंजाब सरकार पर हर विपक्षी दल ने पैसों की बर्बादी का आरोप लगाया. उम्मीद की जा सकती है की जब अगली बार कबड्डी कप का आयोजन होगा तक इसका मकसद सिर्फ खेल की और खिलाडियों का विकास होगा.

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