पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी मैदान तैयार हो रहा है. नवम्बर के महीने में जहाँ पंजाब सरकार विश्व कबड्डी कप के सहारे लोकप्रियता पाने के काम में लगी रही वहीँ कोंग्रेस पार्टी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्त्व में पंजाब बचाओ यात्रा निकलकर लोगों को अपने पक्ष में खड़ा करने की कोशिश की. इस दौरान दोनों ही पार्टी के नेताओं के बीच जोरदार वाक् युद्ध चलता रहा. इसमें कई बार दोनों ही तरफ से मर्यादा की सीमा भी लाँघ दी गई. हालाँकि इस वाक् युद्ध में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके उप मुख्यमंत्री बेटे सुखबीर सिंह बादल पर भारी पड़ते दिखे. कैप्टन को पंजाब में फायर ब्रांड नेता के तौर पर जाना जाता है. दो महीने पहले तक वो शिरोमणि अकाली दल की सरकार और बादल पिता पुत्र को लेकर आक्रामक तो थे लेकिन उतने नहीं जीतने वो अक्सर होते हैं. लेकिन नवम्बर में जैसे ही पंजाब बचाओ यात्रा शुरू हुई तो कैप्टन भी अपने पुराने रंग में आ गये.
पंजाब की राजनीती को समझने वाले मानते हैं की यहाँ जो नेता अपने विरोधी को जितना कड़वा बोलता है उसे लोग उतना ही पसंद करते हैं. इस मामले में कैप्टन बादलों पर भारी पड़ते रहे हैं. २००७ में राज्य में सत्ता से कोंग्रेस बाहर हुई थी और शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की सरकार बनी थी. इसके बाद कैप्टन अमरिंदर की विधानसभा की सदस्यता को भी खत्म किया गया लेकिन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से लड़ाई जीती और दोबारा विधानसभा में बैठे. अपने दो साल के विधानसभा से निलंबन के दौरान वो पंजाब से लगभग "गायब" रहे. लेकिन कुछ मामलों को लेकर उनकी चर्चा लगातार होती रही. लगभग डेढ़ साल पहले उन्हें फिर से पार्टी हाई कमान ने पंजाब कोंग्रेस का अध्यक्ष बना दिया. ये पार्टी में उनके विरोधियों के लिए तो झटका था लेकिन राज्य के कोंग्रेसी कार्यकर्ताओं में इस खबर से जोश भर गया. पंजाब कोंग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह का ज़बरदस्त जलवा है. वो जहाँ भी होते हैं कोंग्रेसी विधायकों की एक फ़ौज उन्हें घेरे रहती है. दोबारा प्रधान बनने के बाद उन्होंने सीधे तौर पर बादल पिता पुत्र पर हमला बोल दिया. कैप्टन ने आरोप लगाये की बादल सरकार ने पंजाब को बर्बाद कर दिया. कैप्टन ने कभी बादल पिता पुत्र को चोर कहा तो कभी उनपर परिवार वाद का आरोप लगा कर जनता को उनसे बचने की नसीहत दी. यही नहीं उन्होंने ये तक कह दिया की दोनों गदाफ्फी जैसे हैं और जनता इनका भी यही हाल करेगी. कई बार अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों में शालीनता की सीमा भी लांघ दी लेकिन उनका मकसद पूरा होता गया. कैप्टन ने अपनी पंजाब बचाओ यात्रा के दौरान लगभग हर जगह ये कहा की अगर अकाली दल उनके किसी वर्कर को एक थप्पड़ मारे तो कोंग्रेसी को चाहिए तो वो उलट कर उस अकाली को दो थप्पड़ रसीद करे. कैप्टन ने यहाँ तक कहा की उनकी सरकार आई तो भ्रष्ट नेताओं और अफसरों को वो उल्टा लटका देंगे. अमरिंदर के ऐसे बयानों से पंजाब के कोंग्रेस वर्कर में जोश बढ़ता गया. आज पंजाब में कोंग्रेस के हालत क्या हैं ये पंजाब में जाकर समझा जा सकता है.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लगातार बादल परिवार पर हमले बोले हैं. परिवार के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा कैप्टन के बयानों को इग्नोर करते हुए कहा की कैप्टन उन्हें जितना भला बुरा कहेंगे लोग उतना कैप्टन के खिलाफ और उनके पक्ष में होते जायेंगे. कैप्टन ने एक बार जब जहा की पंजाब की वर्तमान सरकार ने राज्य को इतना बर्बाद कर दिया है की आने वाली सरकार को राज्य में काम करने में दिक्कत आएगी तो प्रकाश सिंह बादल ने कहा की कैप्टन साहब को चिंता नहीं करनी चाहिए क्यूंकि उनकी तो सरकार ही नहीं आनी है. हमारी ही सरकार आएगी और हम बहुत बढ़िया तरीके से अपना काम करेंगे. बड़े बादल जहाँ अमरिंदर सिंह के बयानों पर संतुलित जवाब देते रहे वहीँ सुखबीर सिंह बादल इस वाक युद्ध में मोर्चे पर डटे रहे. अमरिंदर सिंह के बादलों को गद्दाफी कहने के बाद सुखबीर बादल ने कहा की असली गद्दाफी तो कैप्टन अमरिंदर सिंह हैं. दोनों एक तरह से भाई हैं. क्यूंकि गद्दाफी की तरह कैप्टन भी राजा हैं. हर सुबह जब वो आइना देखते हैं तो उसमे भी उन्हें खुद की जगह गद्दाफी ही नज़र आता है. इसलिए वो बौखला गये हैं और ऐसे ब्यान दे रहे हैं. अमरिंदर सिंह और सुखबीर बादल में ज़ोरदार वाक युद्ध जारी है. दोनों को पता है की पंजाब जैसे राज्य में चुनाव के समय में ये कितना जरुरी है.
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला इन्ही दोनों दलों के बीच होना है. राज्य में तीसरे विकल्प के तौर पर उभर रहे तीसरे मोर्चे में शामिल सुखबीर बादल के चचेरे भाई मनप्रीत बादल की पार्टी पीपीपी इस युद्ध में खुद को शामिल करने से बच रही है. मनप्रीत बादल को ये पता है की उनका एजेंडा इस बयान बाजी में ना पड़कर उन मुद्दों की तरफ लोगों का धयान दिलवाना है जिसे कोंग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने भुला दिया है. वो लगातार पंजाब के पिछड़ेपन, बेरोजगारी और लाल बत्तियों के मामले पर ही ब्यान देकर लोगों से अपील कर रहे है की इस बार के चुनाव में जनता उन्हें एक मौका दे. उनके साथ राज्य की वामपंथी पार्टियाँ भी हैं. कहीं ना कहीं मनप्रीत बादल तीखे बयानों से बचकर अपने काम में लगे हैं जिसका उन्हें फायदा भी मिल रहा है.
पंजाब में संभवत फ़रवरी के दुसरे हफ्ते में विधानसभा चुनाव होंगे. ऐसे में अगले दो महीने और पंजाब में चल रहा ये वक युद्ध और गर्मी पकड़ेगा. हम उम्मीद कर सकते हैं की बयानों की सी गर्मी में लोकतंत्र की पवित्रता नहीं पिघलेगी और नेता एक दुसरे पर बयान देते समय शालीन बने रहेंगे क्यूंकि जनता का मूड कब कैसा हो जाए ये सिर्फ जनता ही जानती है.
नेताओं के बोल-
कैप्टन अमरिंदर सिंह- मुख्यमंत्री चोर और लुटेरों का सरगना है, ये गदाफ्फी जैसे हैं. ये मुझसे कहते हैं की मुझसे बात करने की तमीज नहीं है. अब आप ही बताएं की मैं चोर को चोर ना कहूँ तो क्या कहूँ?
प्रकाश सिंह बादल- कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे बारे में जितना कड़वा बोलेंगे पंजाब की जनता उतना ही उनसे अलग होगी और हमारे पक्ष में आएगी. वो जैसा बोलते हैं ऐसा किसी भी नेता और पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री को शोभा नहीं देता.
सुखबीर सिंह बादल- कैप्टन और गदाफ्फी दोनों भाई जैसे हैं. दोनों ही राजा हैं. कैप्टन इतने बोखला गये है की अनाप शनाप ब्यान देते रहते हैं. ऐसे नेता से भला पंजाब की जनता क्या उम्मीद करेगी?
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